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Wednesday, February 19, 2020
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निर्भया को इंसाफ मिलने में हो सकती है ओर देरी

इस  बार फिर निर्भया को इंसाफ मिलने में देरी होती दिखाई दे रही है ।  निर्भया के आरोपियों को सजा देना अब असंभव सा लगता दिखाई दे रहा है । दरअसल एक बार फिर  निर्भया के एक दोषी ने फांसी लगने में रोड अटकाने शुरू कर दिए है।

मुकेश  कुमार ने हाईकोर्ट में अर्जी डाल दी। जिसमे मुकेश ने डेथ वारंट पर रोक लगाने की मांग की है और अब हाईकोर्ट उस सुनवाई कर रहा है। इस अर्जी में मुकेश ने कहा है कि उसकी दया याचिका अभी राष्ट्रपति के पास लंबित है, इसलिए डेथ वारंट को रद्द कर दिया जाए ।

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इस मामले पर सुनवाई के दौरान सुनवाई के दौरान दिल्ली एएसजी और दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि निर्भया के दोषियों को 22 जनवरी को फांसी नहीं दी जा सकती है । इसके साथ ही  कोर्ट ने कहा है की यदि राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका पर फैसला आ जाता है तो उसके बाद भी दोषियों को 14 दिन का वक्त देना होगा । ऐसे में अब निर्भया को इंसाफ मिलने की उम्मीदें खत्म सी होती दिख रही है।

लेकिन अभी इस पर अभी फैसला आना बाकि है । बता दें मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ बुलाई  गयी थी और पीठ ने ने मुकेश की क्यूरेटिव याचिका खारिज कर दी थी।

इसके साथ ही 18 दिसंबर को तिहाड़ जेल अथॉरिटी ने सभी दोषियों को नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में ये कहा गया है कि यदि कोई दोषी दया याचिका दाखिल करना चाहता है कि 7 दिन के अंदर कर सकता है ।

इस दौरान दोषियों  ने एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिये कहा कि उनके केस पर सही से कार्रवाही नहीं की जा रही है।

बता दे कि  इस समय मुकेश कुमार का केस वरिष्ठ वकील रिबाका जॉन लड़ रही है और उन्होंने मुकेश की पेहरवी करते हुए कहा है कि 7 जनवरी को ट्रायल कोर्ट की ओर से पारित आदेश अभी तक मान्य  नहीं हो सका है । इसेक साथ ही उन्होंने कहा कि यदि हम 18 दिसंबर के आदेश पर दया याचिका दायर करने के लिए 7 दिन का नोटिस देते तो 25 दिसंबर को यह समाप्त हो जाता । लेकिन एमिकस को दोषी से मिलने की अनुमति 30 तारीख को दी गई और दोषी ने तुरंत बताया कि वह एक क्यूरेटिव फाइल करने का इरादा रखता है।

बातचीत में रिबाका जॉन ने कहा कि मैं इतना चाहती हूँ कि राष्ट्रपति इस  आवेदन पर विचार करें और दो टुक कहते हुए रिबाका जॉन ने कहा कि दया याचिका राष्ट्रपति का संवैधानिक कर्तव्य है और यह कोई अनुग्रह का काम नहीं है।

लेकिन वही रिबाका जॉन कि बात पर हाईकोर्ट ने कहा, कि आपकी अपील अप्रैल 2017 में खारिज कर दी गई थी । लेकिन तब भी  तब भी आपने ढाई साल तक इंतजार किया उस समय अपने एक समीक्षा याचिका तक दर्ज नहीं की, कोई क्यूरेटिव भी फ़ाइल नहीं किया ।

आखिर ये  दाखिल करने से आपको किसने रोका था इसके साथ ही कोर्ट ने मामले को मद्दे नज़र रखे हुए कहा कि कोई डेथ वारंट जारी होने तक दया याचिका दायर करने का इंतजार क्यों करेगा । दोषी को कोर्ट जाने के लिए मुकम्मल वक्त दिया गया है। 

हालाकिं अभी तक ये साफ नही हो सका है कि आखिर निर्भया के दोषियों को सजा कब मिलेगी । निर्भया के माता पिता में  उम्मीद की एक किरण जलती है जो कुछ समय बाद ही बुझती सी दिखाई देने लगती है। 

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